उपजाति छोड़ो, पटेल जोड़ो के सूत्रधार रामदेव पटेल ने बदली पिछड़े समाज की राजनीतिक दिशा

रामदेव पटेल का जन्म 20 अगस्त 1951 को जनपद फैजाबाद (वर्तमान अयोध्या) के ग्राम रुहियावा (रौंकवा), पोस्ट महबूबगंज में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम राम निहोर, माता का नाम धर्मा देवी तथा बाबा का नाम बाड़ू था।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों की एकता और शिक्षा के प्रसार के लिए जीवन समर्पित करने वाले नेता  यशकारी रामदेव पटेल जी का जन्म 20 अगस्त 1951 को जनपद फैजाबाद (वर्तमान अयोध्या) के ग्राम रुहियावा (रौंकवा), पोस्ट महबूबगंज में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम राम निहोर, माता का नाम धर्मा देवी और बाबा का नाम बाड़ू था। उस समय ग्रामीण समाज में सामंतवादी व्यवस्था का गहरा प्रभाव था, जिसके खिलाफ क्षेत्र में लगातार सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन चल रहे थे।

शिक्षा और प्रारंभिक संघर्ष

रामदेव पटेल की प्रारंभिक शिक्षा सेवागंज प्राथमिक विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने महबूबगंज विद्यालय से मिडिल और गोसाईगंज स्थित रामबली इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। उस दौर में गोसाईगंज उनके गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर था, जहां वे रोज़ पैदल जाकर पढ़ाई करते थे। उनकी शिक्षा में उनके गुरु मास्टर रामकिशोर वर्मा और रामबली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य महादेव प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने उनमें सामाजिक चेतना और सामंतवाद के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा दी।

उच्च शिक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारी

उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने साकेत महाविद्यालय, फैजाबाद में प्रवेश लिया और कठिन परिस्थितियों में बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने आजमगढ़ के शिब्ली इंटर कॉलेज से बीएड की परीक्षा उत्तीर्ण की। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी बहन डॉ. भानुमति वर्मा की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी निभाई और उन्हें आगे बढ़ने में सहयोग किया।

सामाजिक कार्य और शिक्षा का अभियान

छात्र जीवन से ही रामदेव पटेल सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ गए थे। वे रामस्वरूप वर्मा और अर्जक आंदोलन के विचारों से प्रभावित रहे और समाज में छुआछूत तथा पाखंड के खिलाफ अभियान चलाते रहे। इसी दौरान उन्होंने गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए उन्हें अयोध्या के पटेल पंचायती कुर्मी मंदिर में ठहराने और पढ़ाने की व्यवस्था भी की। गांव-गांव जाकर अनाज एकत्र कर बच्चों की पढ़ाई और रहने का खर्च चलाया जाता था।

राजनीति में सक्रिय भूमिका

सामाजिक आंदोलनों के साथ-साथ रामदेव पटेल राजनीति में भी सक्रिय रहे। 1983 में उन्होंने अकबरपुर तहसील (तत्कालीन फैजाबाद) में एक विशाल कुर्मी सम्मेलन का आयोजन कराया, 20 हजार प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

1984 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर कटेहरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और लगभग 17 हजार मत प्राप्त किए। इसके बाद 1989 और 1990 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा। 1993 में सपा-बसपा गठबंधन के दौरान उन्होंने कटेहरी विधानसभा से लगभग 75 हजार मत प्राप्त कर करीब 45 हजार वोटों से जीत दर्ज की और विधायक बने।

कुर्मी समाज की एकता के लिए प्रयास

कुर्मी समाज को एकजुट करने के लिए रामदेव पटेल ने 11 नवंबर 1994 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में ऐतिहासिक “उपजाति छोड़ो, पटेल जोड़ो” रैली का संयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से लगभग 50 विधायक और हजारों लोग शामिल हुए। इसे उस समय जातीय रैलियों के इतिहास की सबसे बड़ी रैलियों में गिना गया।

इसके बाद 1995 में लखनऊ में आयोजित कुर्मी स्वाभिमान महारैली के मंच से “अपना दल” के गठन की घोषणा हुई, जिसमें रामदेव पटेल को संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और सोनेलाल पटेल को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई।

सामाजिक न्याय की राजनीति

रामदेव पटेल समाजवादी राजनीति से भी जुड़े रहे और समाजवादी पार्टी में उत्तर प्रदेश के महासचिव बने। उन्होंने बेनी प्रसाद वर्मा जैसे नेताओं के साथ मिलकर क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कई विकास कार्यों को आगे बढ़ाया।

15 जनवरी 2006 को लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में आयोजित कुर्मी महारैली में भी उन्होंने संयोजक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें लगभग डेढ़ लाख लोगों की भीड़ जुटी।

रामदेव पटेल जी अखिल भारतीय कुर्मी महासभा में सक्रिय रहे और संगठन को मजबूत करने के लिए पूरे देश का भ्रमण किया। उन्होंने समाज में शिक्षा, संगठन और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर काम किया। वे सामाजिक आंदोलनों के साथ-साथ पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाते रहे।

अंतिम समय और विरासत

लंबे समय से गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे रामदेव पटेल का 7 मार्च 2012 को उनके पैतृक गांव रूहियावा (रौंकवा) में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। अंतिम समय तक वे अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे और उत्तर प्रदेश तथा बिहार के प्रभारी थे। उनका पूरा जीवन शोषित, वंचित और पिछड़े समाज को शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों के माध्यम से मुख्यधारा में लाने के लिए समर्पित रहा।

आज उनके परिवार में बहन डॉ. भानुमति वर्मा अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं, जबकि भाई डॉ. रामतीर्थ पटेल शिक्षाविद् हैं। उनके पुत्र डॉ. अमित पटेल भी सामाजिक अधिकारों और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

समाज में शिक्षा, संगठन और सामाजिक न्याय की जो मशाल रामदेव पटेल ने जलाई, उसे क्षेत्र के लोग आज भी सम्मान और प्रेरणा के साथ याद करते हैं।