मंटू सिंह पटेल की पहल से पटेल छात्रावास अभियान को मिली नई पहचान ,कुर्मी राजनीति के उभरते केंद्र बने

पटना। बिहार की राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि निरंतर जनसंपर्क और सामाजिक सक्रियता के कारण वे समाज के बीच एक संस्था के रूप में स्थापित हो जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व आईटी मंत्री और अमनौर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक बने कृष्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू सिंह पटेल को भी ऐसे ही नेताओं में गिना जा रहा है।

बिहार में कुर्मी समाज की राजनीति की चर्चा हो और मंटू सिंह पटेल का नाम आए, ऐसा अब कम ही देखने को मिलता है। वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। उनकी राजनीतिक कार्यशैली में भी लगातार जनसंवाद, लोगों के बीच उपलब्ध रहने और सामाजिक भागीदारी की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।

गांव की चौपाल से विधानसभा तक का सफर

मंटू सिंह पटेल की राजनीतिक यात्रा किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं, बल्कि गांव और पंचायत की राजनीति से शुरू हुई। उन्होंने सबसे पहले पैक्स अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह मुखिया बने और धीरे-धीरे जनता के भरोसे विधानसभा तक पहुंचे।

वर्तमान में वह सारण जिले की अमनौर विधानसभा सीट से लगातार तीसरे कार्यकाल के विधायक हैं। उनकी पत्नी परसा प्रखंड की प्रमुख हैं। इससे अमनौर सहित आसपास के क्षेत्रों में परिवार की राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता भी मजबूत मानी जाती है।

विधायक आवास पर प्रतिदिन लगता है जनता का दरबार

पटना के आर ब्लॉक स्थित उनके विधायक आवास पर सुबह से देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। बिहार के अलग-अलग जिलों से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचते हैं।

कोई रोजगार से जुड़ी सहायता की उम्मीद लेकर आता है, कोई प्रशासनिक समस्या के समाधान की मांग करता है, तो कोई सामाजिक या पारिवारिक विवाद में सहयोग चाहता है। उनके आवास का माहौल किसी विधायक आवास से अधिक एक सक्रिय जनसंपर्क कार्यालय जैसा नजर आता है।

यहां पहुंचने वालों में बड़ी संख्या कुर्मी और पटेल समाज के लोगों की भी होती है। हालांकि मंटू सिंह पटेल सभी जाति, वर्ग और समुदाय के लोगों की समस्याएं सुनने और यथासंभव सहायता करने की बात करते हैं।

पटेल छात्रावास अभियान से समाज को मिला साझा मंच

पूरे बिहार में चल रहे पटेल छात्रावास निर्माण अभियान में मंटू सिंह पटेल की सक्रिय भूमिका को उनकी सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। विभिन्न जिला मुख्यालयों पर छात्रावास निर्माण की पहल से समाज के युवाओं और विद्यार्थियों को शिक्षा तथा आवास के क्षेत्र में सहयोग मिलने की उम्मीद है।

इस अभियान ने कुर्मी-पटेल समाज को एक साझा मंच देने का काम भी किया है। यही कारण है कि समाज का एक बड़ा वर्ग मंटू सिंह पटेल को केवल विधायक के रूप में नहीं, बल्कि अपने प्रतिनिधि और संरक्षक के तौर पर भी देखता है।

सामाजिक आयोजनों में सहभागिता से मजबूत हुआ संपर्क

मंटू सिंह पटेल की एक प्रमुख विशेषता लोगों के सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी मानी जाती है। बिहार के किसी भी जिले से पटेल समाज या अन्य वर्ग का कोई व्यक्ति सामाजिक कार्यक्रम, सम्मान समारोह, विवाह या पारिवारिक आयोजन का निमंत्रण लेकर पहुंचता है, तो वह समय निकालकर कार्यक्रम में शामिल होने का प्रयास करते हैं।

समाज के बीच उनकी निरंतर मौजूदगी और संवाद ने उन्हें दूसरे नेताओं से अलग पहचान दिलाई है। किसान, छात्र, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक उनके संपर्क में बने रहते हैं।

मंटू सिंह पटेल अक्सर कहते हैं, “राजनीति में कब कौन कहां होगा, यह कोई नहीं जानता। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वह जनता की बदौलत हूं। जनता ही मेरे लिए भगवान है। इसलिए मैं किसी को निराश या नाराज नहीं करना चाहता। जहां तक संभव हो, प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करना ही मेरी राजनीति का उद्देश्य है।

भाजपा में प्रभावशाली कुर्मी चेहरे के रूप में पहचान

बिहार की राजनीति इस समय नए सामाजिक और जातीय समीकरणों के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में मंटू सिंह पटेल ने संगठन, समाज और आम जनता के बीच सक्रिय रहकर अपने लिए अलग राजनीतिक स्थान बनाया है।

भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी उन्हें कुर्मी समाज के प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है। उनकी राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा आधार उनका निरंतर जनसंपर्क, सामाजिक भागीदारी और जनता के लिए उपलब्ध रहने की कार्यशैली मानी जाती है।

आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति और भाजपा संगठन में उनकी भूमिका कितनी बड़ी होगी, यह भविष्य तय करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट है कि मंटू सिंह पटेल ने अपनी राजनीति का आधार केवल चुनावी सफलता को नहीं, बल्कि जनता के बीच निरंतर उपस्थित रहने की संस्कृति को बनाया है। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी मानी जा रही है।