श्रावस्ती में संगठन के जिला अध्यक्ष पर गोली, कानून व्यवस्था और महासभा की भूमिका पर उठे सवाल
श्रावस्ती जनपद में दिनदहाड़े गोली चलने की घटना ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुलेआम कट्टा-पिस्तौल से फायरिंग कर आरोपी का आराम से फरार हो जाना यह दर्शाता है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं। यह सिर्फ़ एक घटना नहीं, बल्कि योगी सरकार की विफल कानून व्यवस्था का ज्वलंत प्रमाण है। सरकार का शासन अब केवल भाषणों, प्रेस विज्ञप्तियों और मीडिया हेडलाइनों तक सीमित रह गया है, जबकि ज़मीन पर अराजकता, डर और अपराध का बोलबाला है।
घटना अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के जिला अध्यक्ष से जुड़ी है, जिन पर सरेआम गोली चलाई गई। यह साफ़ दिखाता है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी न तो त्वरित कार्रवाई सामने आई और न ही संगठन की ओर से कोई मजबूत और निर्णायक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इस पूरे मामले ने अब अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं ।
समाज के लोगों का कहना है कि जब संगठन अपने ही पदाधिकारियों की सुरक्षा और न्याय के लिए प्रभावी आवाज़ नहीं उठा पा रहा है, तो वह कुर्मी समाज की आम जनता के अधि कार, सम्मान और सुरक्षा के लिए क्या संघर्ष करेगा।

स्थानीय लोगों और समाज के जागरूक वर्ग का मानना है कि प्रदेश में शासन अब केवल भाषणों और मीडिया बयानों तक सीमित रह गया है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। श्रावस्ती की यह घटना उसी अव्यवस्था का उदाहरण बनकर सामने आई है।
अब कुर्मी समाज के बीच यह चर्चा तेज़ हो गई है कि संगठन को केवल नाम और पद तक सीमित न रहकर, ठोस कार्रवाई और स्पष्ट रुख अपनाना होगा। अन्यथा समाज का विश्वास संगठन से उठता चला जाएगा।
फिलहाल, समाज की निगाहें प्रशासन और संगठन—दोनों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या यह घटना भी फाइलों और बयानों में दबकर रह जाएगी
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