सरकारी योजनाओं और नई तकनीक का कमाल, किसान ग्रीक चंद पटेल ने बढ़ाई पैदावार और आमदनी

कोण्डागांव जिले के कुम्हारपारा निवासी प्रगतिशील किसान ग्रीक चंद पटेल ने आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण और शासन की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना दिया है। पारंपरिक धान की खेती के साथ सब्जी उत्पादन और नैनो उर्वरकों के उपयोग से उन्होंने अपनी फसलों की गुणवत्ता, उत्पादन और आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

ग्रीक चंद पटेल खरीफ और रबी, दोनों मौसम में खेती करते हैं। कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए वे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की खरीद के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता भी खेती के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था में उनके लिए मददगार साबित हो रही है।

नैनो उर्वरकों से बढ़ी फसल की गुणवत्ता और पैदावार

उन्होंने आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नैनो उर्वरकों का उपयोग भी शुरू किया है। सूक्ष्म कणों पर आधारित इन उर्वरकों का पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी रूप से मिलते हैं। इससे पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है और फसलों की बेहतर वृद्धि में मदद मिलती है।

ग्रीक चंद पटेल के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग के बाद उनकी फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।

धान के साथ सब्जी उत्पादन से बढ़े आय के अवसर

धान की खेती के साथ-साथ वे विभिन्न मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रहे हैं। फसल विविधीकरण अपनाने से उन्हें पूरे वर्ष आय के अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं। बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग फसलों का उत्पादन कर वे अपनी आमदनी में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं।

खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए वे रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय जैविक खाद के उपयोग को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ खेती की लागत को संतुलित करने में भी मदद मिल रही है।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

ग्रीक चंद पटेल ने यह साबित किया है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

उनकी सफलता उन किसानों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है, जो पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों और वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी उत्पादकता और आय बढ़ाना चाहते हैं।

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