फसल विविधीकरण से बढ़ी किसान की आय, कमल पाटीदार ने पेश की नई मिसाल

ग्राम हरसोदन के प्रगतिशील किसान ने सोयाबीन के साथ मूंगफली, मूंग और स्वीट कॉर्न की खेती शुरू कर कम किया फसल नुकसान का जोखिम

जिले के ग्राम हरसोदन निवासी प्रगतिशील कृषक श्री कमल पाटीदार ने फसल विविधीकरण अपनाकर खेती में नवाचार और आय बढ़ाने की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्होंने एक ही फसल पर निर्भरता कम की और विभिन्न फसलों की खेती शुरू की है।

श्री कमल पाटीदार ने बताया कि पहले वे अपनी संपूर्ण कृषि भूमि पर सोयाबीन की खेती करते थे। मौसम, कीट प्रकोप और अन्य कारणों से उन्हें प्रत्येक वर्ष फसल में नुकसान उठाना पड़ता था। इसके साथ ही आमदनी भी सीमित रहती थी। कृषि विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने फसल विविधीकरण की जानकारी प्राप्त की और अलग-अलग फसलों की खेती प्रारंभ की।

उन्होंने तीन हेक्टेयर भूमि में फसल विविधीकरण करते हुए एक हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली, आधा हेक्टेयर में स्वीट कॉर्न, आधा हेक्टेयर में मूंग तथा एक हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की फसल लगाई है। विभिन्न फसलों की खेती से अब उन्हें पहले की तुलना में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

श्री पाटीदार ने बताया कि स्वीट कॉर्न के भुट्टों की तुड़ाई बुवाई के लगभग 70 से 80 दिन बाद की जा सकती है। भुट्टों की तुड़ाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष का उपयोग साइलेज और पशु आहार के रूप में किया जाता है। इससे किसानों को फसल के साथ-साथ पशुपालन में भी अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है।

उन्होंने मूंगफली की फसल रिज-फरो यानी कुंड विधि से लगाई है। इस तकनीक से खेत में बेहतर वायु संचार बना रहता है। इसके अलावा पेगिंग, सिंचाई और फसल की कटाई में भी आसानी होती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि की संभावना रहती है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि कृषि में जोखिम कम करने और किसानों में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए फसल विविधीकरण एक प्रभावी तरीका है। एक ही फसल पर निर्भर रहने की अपेक्षा किसान अलग-अलग फसलों की खेती कर नुकसान की आशंका को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वीट कॉर्न अपने विशेष स्वाद और मिठास के कारण देश-दुनिया में लोकप्रिय है। बाजार में इसकी अच्छी कीमत और लगातार बढ़ती मांग किसानों को इसकी खेती की ओर आकर्षित कर रही है।

मालवा क्षेत्र में प्राचीन समय से मूंगफली की खेती होती रही है, लेकिन बाद में सोयाबीन का रकबा तेजी से बढ़ गया। वर्तमान परिस्थितियों में सोयाबीन की फसल से जुड़े जोखिम को देखते हुए मूंगफली एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने रही है। इससे तिलहन उत्पादन भी प्रभावित नहीं होता और किसानों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो सकती है।

कृषि विभाग ने अन्य किसानों से भी श्री कमल पाटीदार के प्रयासों से प्रेरणा लेकर वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण को अपनाने की अपील की है।