गांव में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई से शाश्वत पटेल ने क्रैक किया NEET-UG, अब न्यूरोलॉजिस्ट बनने का सपना

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फतेहपुर। कहते हैं कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इस बात को सच साबित किया है तेलियानी विकास खंड क्षेत्र के झाऊ मेदनीपुर गांव निवासी शिक्षक पुत्र शाश्वत पटेल ने। गांव में रहकर घर से ऑनलाइन पढ़ाई करते हुए शाश्वत ने प्रतिष्ठित NEET-UG परीक्षा में 596 अंक हासिल किए हैं। उन्हें ऑल इंडिया स्तर पर 11,419 कैटेगरी रैंक मिली है।

अपनी मेहनत और अनुशासित दिनचर्या के दम पर सफलता हासिल करने वाले शाश्वत का सपना अब डॉक्टर बनकर न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना है। वह एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के उपचार के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।

दादी की बीमारी के दौरान मन में जगा डॉक्टर बनने का सपना

शाश्वत के पिता परशुराम पटेल तेलियानी विकास खंड के पनई इनायतपुर जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक हैं। परिवार मूल रूप से झाऊ मेदनीपुर गांव का रहने वाला है।

शाश्वत बताते हैं कि डॉक्टर बनने का सपना उनके मन में हाईस्कूल के दौरान ही आकार लेने लगा था। वर्ष 2022 में उनकी दादी मुन्नी देवी बीमार हुईं तो वह पिता के साथ उन्हें इलाज के लिए कानपुर के एक अस्पताल ले गए। वहां उनके चचेरे मामा डॉ. रंजीत पटेल चिकित्सक के रूप में कार्यरत थे। अस्पताल का माहौल और डॉक्टरों को मरीजों की सेवा करते देखकर शाश्वत के मन में भी डॉक्टर बनने की प्रेरणा जगी।

इसके बाद उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाने का लक्ष्य तय कर लिया।

हाईस्कूल में 94 और इंटरमीडिएट में हासिल किए 88 प्रतिशत अंक

पढ़ाई में शुरू से मेधावी रहे शाश्वत ने हाईस्कूल की परीक्षा 94 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। वर्ष 2024 में उन्होंने हंशग्रीन पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा 88 प्रतिशत अंक हासिल कर पास की।

इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने पूरी तरह NEET-UG की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर दिया। किसी बड़े शहर में जाकर कोचिंग करने के बजाय उन्होंने घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई को अपना माध्यम बनाया।

फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोर्स लिया और नियमित रूप से तीनों विषयों की कक्षाएं कीं। प्रतिदिन घंटों ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ वह पढ़ाए गए टॉपिक्स का अभ्यास और प्रश्नों का रिवीजन भी करते थे। लगातार मेहनत और अनुशासन का परिणाम उन्हें NEET-UG में शानदार सफलता के रूप में मिला।

मोबाइल से बनाई दूरी, टैबलेट बना पढ़ाई का सहारा

आज जब विद्यार्थियों के लिए मोबाइल फोन पढ़ाई के साथ-साथ सबसे बड़ा भटकाव भी बन सकता है, शाश्वत ने तैयारी के दौरान इससे दूरी बनाए रखी।

शाश्वत बताते हैं कि पिछले वर्ष तक उनके पास अपना मोबाइल फोन नहीं था। इंटरमीडिएट पास करने के बाद पिता ने उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक टैबलेट दिलाया था। उसी टैबलेट के जरिए वह अपनी कक्षाएं लेते और पढ़ाई करते थे।

गांव में बिजली की अनियमित आपूर्ति भी कई बार उनकी पढ़ाई में बाधा बनी। कभी टैबलेट की बैटरी खत्म हो जाती तो कभी बिजली होने के कारण लाइव क्लास छूट जाती। ऐसे में उन्होंने हार नहीं मानी और रिकॉर्डेड क्लास के जरिए अपनी पढ़ाई पूरी की।

शाश्वत का मानना है कि मोबाइल फोन पास रहने पर अनजाने में भी ध्यान भटकने की संभावना रहती है। इसलिए उन्होंने तैयारी के महत्वपूर्ण समय में खुद को सोशल मीडिया और मोबाइल से दूर रखकर पूरी तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रखा।

सुबह पशुओं की देखभाल, फिर घंटों पढ़ाई

शाश्वत की सफलता के पीछे उनकी बेहद अनुशासित दिनचर्या भी रही। वह प्रतिदिन सुबह करीब पांच बजे उठते थे। सबसे पहले घर के पशुओं से जुड़े काम निपटाते और खेत से उनके लिए चारा लेकर आते। चारा मशीन से काटने सहित घरेलू जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद सुबह आठ बजे तक ऑनलाइन क्लास के लिए तैयार हो जाते थे।

इसके बाद वह एकांत कमरे में बैठकर पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते। ऑनलाइन कक्षाओं में जो कुछ पढ़ाया जाता, शाम को उसका दोबारा अभ्यास करते और अधिक से अधिक प्रश्न हल करने की कोशिश करते।

पिछले करीब दो वर्षों तक उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी। यहां तक कि रिश्तेदारों के यहां होने वाले कार्यक्रमों में जाना भी लगभग छोड़ दिया और खुद को एक निश्चित दिनचर्या में ढाल लिया।

शाश्वत बताते हैं कि घरेलू और पशुओं से जुड़े काम करने से उनका शरीर भी सक्रिय रहा। पढ़ाई के लंबे घंटों के बावजूद वह शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त बने रहे।

बेटों की परवरिश के लिए मां ने नहीं ज्वाइन की सरकारी नौकरी

शाश्वत की सफलता के पीछे माता-पिता का संघर्ष और त्याग भी महत्वपूर्ण रहा है। पिता परशुराम पटेल परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं। उनकी पत्नी रीता देवी ने वर्ष 2021 में TET और CTET पास करने के बाद शिक्षक पद के लिए आवेदन किया था।

उनका चयन शिकोहाबाद में हुआ, लेकिन उस समय बच्चों की पढ़ाई और देखभाल की जिम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने नौकरी ज्वाइन नहीं करने का फैसला किया। परिवार ने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी और मां ने अपने करियर से बड़ा बच्चों के भविष्य को माना।

पिता परशुराम कहते हैं कि बच्चों की बेहतर परवरिश और पढ़ाई के लिए उनकी पत्नी ने बड़ा त्याग किया। आज बेटे की सफलता देखकर उन्हें लगता है कि परिवार की मेहनत और त्याग सार्थक हो रहा है।

माता-पिता ने कहा- बच्चे की मेहनत पर था पूरा भरोसा

शाश्वत की मां रीता देवी और पिता परशुराम पटेल बताते हैं कि इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने बेटे को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने की सलाह दी थी, लेकिन शाश्वत ने साफ कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहते हैं।

बेटे की इच्छा और दृढ़ संकल्प देखकर माता-पिता ने भी उसका पूरा साथ दिया। शिक्षक होने के नाते परशुराम जानते थे कि मेडिकल की पढ़ाई और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आसान नहीं है, लेकिन उन्हें बेटे की मेहनत और लगन पर पूरा भरोसा था।

मां रीता देवी कहती हैं कि उन्होंने हमेशा अपने बेटे को वही क्षेत्र चुनने की सीख दी, जिसमें उसका मन लगे। उनका मानना है कि जब बच्चा अपनी रुचि के क्षेत्र को लक्ष्य बनाकर मेहनत करता है, तभी वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाता है।

अब शाश्वत का अगला लक्ष्य मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टर बनना है। गांव के सीमित संसाधनों के बीच हासिल की गई उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी को अपनी राह की बाधा मान लेते हैं।