बलरामपुर सेखुईया कांड : कुर्मी समाज सड़क पर, प्रशासन पर आरोप—मुख्य आरोपी को संरक्षण? जल्द होगा ये परिणाम

बलरामपुर सेखुईया कांड का बड़ा EXPOSE: स्टेनो राहुल सिंह और गाली-बाज़ लड़की हैं मुख्य आरोपी—लेकिन प्रशासन की ‘ममता कवच’ में है सुरक्षित ? कुर्मी समाज न्याय के लिए रोड पर

विशेष रिपोर्ट : डॉ. लव कुश पटेल (संपादक - बेबाक मंच)
बलरामपुर के चर्चित सेखुईया कांड में नहीं मिल रहा न्याय जिसको ले कर कुर्मी समजा के चिंतक सड़कों पर उतरे हुए है । कुर्मी समाज का आरोप है कि यह पूरा प्रकरण केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा ठाकुर जाती को बचाने की सुनियोजित लीपापोती  कर रही है।

कुर्मी समाज की ओर से जिन दो लोगों को इस पूरे कांड के केंद्र में बताया जा रहा है, वे हैं- एसडीएम का स्टेनो राहुल सिंह और दूसरी वह लड़की, जिसका अशोभनीय और उकसाने वाला वीडियो पूरे प्रदेश में वायरल हुआ।

विडंबना यह कि कुर्मी समाज के नेताओं पर लॉकडाउन जैसी पाबंदियाँ, लेकिन इन दोनों मुख्य आरोपियों पर पुलिस की की ढिलाई बनी हुई है यही दोहरा रवैया पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है।

कुर्मी समाज ने भरोसा दिखाया… प्रशासन ने वादाखिलाफी

29 अक्टूबर को प्रदेशभर से कुर्मी समाज के लोग बलरामपुर पहुंचे थे। प्रशासन ने 3 दिन मांगे कुर्मी समाज ने 10 दिन दिए थे । लेकिन  समय सीमा खत्म होने के कई दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी न होने, प्रशासन ढिलाई और कोई तथ्यात्मक अपडेट न मिलने से कुर्मी समाज में निराशा ।
इसके विपरीत 29 नवंबर को जब लोग एसपी से जवाब मांगने निकले तो प्रशासन ने लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का रास्ता चुना।

लखनऊ से गोंडा तक—कुर्मी समाज को ‘हाउस अरेस्ट’…  पर आरोपी आज़ाद

लखनऊ, बस्ती, गोंडा, बनारस, शाहजहांपुर व अन्य जिले में कुर्मी समाज से जुड़े मुखर युवा और समाजिक प्रतिनिधियों को घर में ही नजरबंद करा दिया गया, ताकि वे बलरामपुर न पहुंच सकें।

मुखर युवा और समाजिक प्रतिनिधियों का सवाल बिल्कुल सीधा है की “अगर यही तेजी एसडीएम के स्टेनो और उस युवती को पकड़ने में दिखाई देती, तो आज न्याय मिल चुका होता।”

कुर्मी समाज का सीधा आरोप—प्रशासन आरोपियों को बचा रहा है

कुर्मी समाज के हॉउस अरेस्ट लोगों का कहना है कि - पीड़ित परिवार अकेला नहीं, पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। लेकिन प्रशासन द्वारा गोलमोल बयानबाज़ी और कागजी कार्रवाई दिखाकर असली दोषियों को सुरक्षा दी जा रही है।

समाजिक नेताओं का यह भी कहना है कि कांड के मुख्य साज़िशकर्ता, आज भी खुलेआम घूम कर साज़िश रहा हैं क्योंकि “उनकी पहुंच उन दरवाजों तक है जहाँ उनकी जाती के लोग उच्य पदों पर बैठे है।

कानून सबके लिए बराबर है… या फिर विशेष लोगों के लिए छूट?

कुर्मी समाज प्रशासन से सवाल कर रहा है- क्या बलरामपुर में न्याय केवल कागजों में है? क्या कुर्मी समाज की आवाज़ दबाई जा रही है और क्या “विशेष लोगों” को बचाने के लिए कानून की किताब ही बदल दी गई है?

लड़ाई जारी…  न्याय तक कोई पीछे नहीं हटेगा

जिन लोगों को हाउस अरेस्ट किया गया है, उनका यह भी कहना है - “यह लड़ाई सिर्फ सेखुईया की नहीं, यह न्याय बनाम सत्ता संरक्षण की लड़ाई है। जब तक दोनों मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, संघर्ष रुकेगा नहीं।”

सेखुईया कांड अब केवल एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि कुर्मी समाज के सम्मान, न्याय और अधिकार से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।