डॉ. राम सिया सिंह: कलम और कर्म से समाजोत्थान के साधक
जन्म एवं परिवार
डॉ. राम सिया सिंह का जन्म 15 सितम्बर 1936 को मध्यप्रदेश के सतना जिले के ग्राम रामस्थान में हुआ। पिता स्व. श्री रघुनाथ सिंह तथा माता स्व. श्रीमती सुखरानी देवी थीं। धर्मपत्नी श्रीमती इन्दु कुमारी हैं। पुत्र चि. अरविन्द सिंह एवं पुत्रवधू श्रीमती रंजना सिंह (आत्मजा श्री हरिशंकर सिंह, प्राचार्य, शाहनगर, जिला पन्ना, म.प्र.) हैं।
शिक्षा
- 1956: बी.ए., आगरा विश्वविद्यालय
- 1958: एम.ए. (राजनीति विज्ञान), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
- 1960: एल.एल.बी., सागर विश्वविद्यालय
- 1965: बी.एड., सागर विश्वविद्यालय
- 1967: पी-एच.डी., जबलपुर विश्वविद्यालय (निर्देशक: डॉ. राजबली पाण्डेय)
शोध विषय: “प्राचीन भारत में नागरिकता”
सामाजिक एवं छात्र जीवन
छात्र जीवन से ही विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय।
- टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा में छात्र संघ के प्रधानमंत्री
- पिछड़ा वर्ग छात्र संगठन के संस्थापक अध्यक्ष
- विन्ध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग संघ के महामंत्री
- 1957-58 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रावास संघ के अध्यक्ष
सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान :
छात्र-जीवन से ही सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता। रीवा कॉलेज छात्रसंघ के प्रधानमंत्री, पिछड़ा वर्ग छात्र संगठन के संस्थापक अध्यक्ष तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रावास संघ (1957-58) के अध्यक्ष रहे। समाजवादी आन्दोलन में तीन बार जेलयात्रा की और डॉ. राममनोहर लोहिया के साथ राजनीति में सक्रिय रहे तथा म.प्र. समाजवादी दल की राज्य समिति के सदस्य रहे।
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ :
छात्र जीवन से ही साहित्यिक अभिरुचि। निबंध एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा तथा सागर विश्वविद्यालय में हिन्दी वाद-विवाद में, और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी एवं अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
संगठन एवं समाजसेवा :
13 जून 1971 को सतना में आयोजित सम्मेलन में कर्मवीर पटेल समाज सेवा परिषद की स्थापना कर इसके संस्थापक अध्यक्ष बने। परिषद द्वारा वार्षिक सम्मेलन, आय-व्यय प्रस्तुतीकरण एवं भावी कार्यक्रमों का निर्धारण किया जाता रहा। बालविवाह, दहेज प्रथा और पाखण्डवाद के उन्मूलन हेतु जनजागरण अभियान चलाया। “जातिभेद क्यों? और क्यों नहीं?” (1960) नामक पुस्तिका की रचना की, जिसकी प्रशंसा डॉ. लोहिया ने भी सराहना की
समाज उत्थान हेतु अनेक रचनात्मक योजनाओं की स्थापना की, जैसे:
(क) डॉ. राम सिया सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
(ख) सरदार वल्लभभाई पटेल छात्रावास
(ग) निर्धन छात्र पुस्तकालय एवं सहायता कोष
(घ) लौहपुरुष पटेल पुस्तकालय एवं वाचनालय
(ङ) सामूहिक आदर्श विवाह आयोजन
साहित्यिक कृतियाँ
सामाजिक साहित्य एवं इतिहास पर 30 से अधिक पुस्तकों की रचना, जिनमें प्रमुख हैं:
- कूर्मवंशी क्षत्रिय कीर्तिकथा
- अखिल भारतीय कू.क्ष. परिचय प्रदीपिका
- सरदार पटेल की अमर गाथा
- समाजसेवी जगमगाते हीरे
- दलितों के मसीहा: राजर्षि छत्रपति शाहू
- गायत्री परिवार ही क्यों?
इन कृतियों के माध्यम से देशव्यापी सामाजिक सम्पर्क एवं जनजागरण का कार्य किया। उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा एवं दिल्ली आदि प्रांतों में व्यापक दौरे एवं रचनात्मक भागीदारी।
पत्रकारिता एवं सम्पादन
पंजीकृत त्रैमासिक पत्रिका विश्व वैभव के प्रधान सम्पादक। यह पत्रिका अखिल भारतीय प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार से सम्मानित हुई।
डॉ. सिंह आजीवन समाज सुधार, साहित्य सृजन और जनजागरण के लिए समर्पित रहे।
गायत्री परिवार से जुड़ाव
1952 से अखिल विश्व गायत्री परिवार और प्रज्ञा अभियान से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। आपके द्वारा सैकड़ों आदर्श विवाह सम्पन्न कराए गए। परिवार की ही एक विधवा बालिका का विवाह गायत्री पद्धति से सतना में सम्पन्न कराकर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया। गायत्री परिवार ही क्यों? पुस्तक की 18,000 से अधिक प्रतियाँ प्रकाशित हुईं। शान्तिकुंज हरिद्वार के केन्द्रीय प्रतिनिधि के रूप में दिल्ली एवं मध्यप्रदेश में विशेष समयदान दिया।
साहित्यिक मान्यता :
तीस से अधिक पुस्तकों के लेखक। अनेक कृतियाँ मध्यप्रदेश शासन एवं भारत सरकार द्वारा अनुमोदित।
सम्मान एवं मान्यता
- उनकी लघुकथाएँ एवं लेख देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित
- गीताकाव्य (भगवद्गीता का पद्यानुवाद) की सराहना भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन तथा डॉ. राजबली पाण्डेय ने की
- उनकी लघुकथाएँ एवं व्यंग्य देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। मार्मिक लघुकथाएँ भारत सरकार, रेल मंत्रालय द्वारा व मध्यप्रदेश शासन द्वारा अनुमोदित एवं पुरस्कृत
विद्वानों की प्रशंसा
डॉ. राम कुमार वर्मा, डॉ. हरिवंशराय बच्चन, डॉ. त्रिलोचन पाण्डेय, हरिशंकर परसाई, डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी, श्री रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’, श्री ओमप्रकाश शिव, श्री मधुप पाण्डेय, डॉ. ब्रजलाल वर्मा तथा डॉ. रामलाल कश्यप सहित अनेक विद्वानों ने आपकी कृतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
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