अयोध्या । शिव शंकर वर्मा हमला मामला: कुर्मी समाज की एकजुटता से टूटी साजिश, 16 आरोपी गिरफ्तार

शिव शंकर वर्मा हमला मामला: कुर्मी समाज की एकता ने झुकाया सिस्टम, न्याय की राह बनी जनशक्ति

अयोध्या जनपद में शिव शंकर वर्मा जी पर हुआ प्राणघातक हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि यह घटना उस सच्चाई को उजागर करती है कि जब तक समाज संगठित नहीं होता, तब तक व्यवस्था अक्सर संवेदनहीन बनी रहती है। यह मामला आज कुर्मी समाज की एकजुटता, संघर्ष और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

हमले के बाद पीड़ित परिवार लगातार तारुन थाना और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन न समय पर सुरक्षा मिली, न ही प्रभावी कार्रवाई। आरोप है कि शुरुआती दौर में हमलावरों को संरक्षण मिला और पीड़ित परिवार को जानबूझकर अकेला छोड़ दिया गया।

12 दिसंबर: जब समाज जागा, तब बदली व्यवस्था

न्याय की सभी औपचारिक उम्मीदें टूटने के बाद 12 दिसंबर को शिव शंकर वर्मा जी की पत्नी ने कुर्मी समाज से सीधे संवाद करते हुए अन्याय के खिलाफ संघर्ष का आह्वान किया।
यह अपील न तो आर्थिक मदद के लिए थी और न ही सहानुभूति के लिए—यह सम्मान, सुरक्षा और न्याय की लड़ाई का ऐलान था।

जैसे ही समाज के युवा, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे, प्रशासन को हरकत में आना पड़ा और तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।

13 दिसंबर: समाज के दबाव में पहली गिरफ्तारी

कुर्मी समाज के संगठित दबाव का असर यह हुआ कि 13 दिसंबर को पुलिस ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस संघर्ष में डॉ. आर. एस. पटेल, डॉ. लवकुश पटेल, पत्रकार अभिषेक पटेल, आत्माराम पटेल, शुभम पटेल, एडवोकेट रामलाल पटेल, अपना दल के जिला अध्यक्ष कृष्ण देव पटेल, अपना दल के प्रदेश अध्यक्ष व उनकी टीम सहित अयोध्या जनपद के अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।

इसी क्रम में अपना दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री आशीष पटेल जी ने 12 दिसंबर को पीड़ित परिवार से फोन पर बात कर उन्हें हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

14 दिसंबर: थाने का घेराव, 16 आरोपी गिरफ्तार

जब कार्रवाई संतोषजनक नहीं लगी, तो 14 दिसंबर को अधिवक्ता अमरेंद्र सिंह बाहुबली, नवरत्न वर्मा, अभिजय पटेल और अधिवक्ता शनी पटेल की टीम के साथ हजारों समाजसेवियों ने पीड़ित परिवार के घर से तारुन थाने तक मार्च कर घेराव किया।

पुलिस और समाज के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत और निरंतर दबाव के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और अब तक कुल 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

जनआंदोलन बना न्याय की मिसाल

यह स्पष्ट हो गया है कि यदि कुर्मी समाज एकजुट न होता, तो सामंतवादी और दबंग मानसिकता के चलते शिव शंकर वर्मा जी को न्याय मिलना बेहद कठिन था।
वर्तमान में पीड़ित की आर्थिक स्थिति कमजोर है और उनका इलाज मंडलीय मेडिकल कॉलेज, अयोध्या में चल रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए डॉ. लवकुश पटेल, पत्रकार अभिषेक पटेल सहित कई सामाजिक चिंतकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक सहयोग की अपील की है, जिस पर समाज के युवा निरंतर सहयोग कर रहे हैं।

यह मामला अब केवल न्याय का नहीं, बल्कि कुर्मी समाज की सामाजिक चेतना, एकता और आत्मसम्मान की पहचान बन चुका है।