जन्मदिन विशेष :चौधरी राजेश मोहन, समाज और साहित्य के प्रकाश स्तंभ
कभी-कभी समय के प्रवाह में ऐसे व्यक्तित्व जन्म लेते हैं, जो केवल अपने जीवन के लिए नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए जीते हैं।
ऐसा ही एक नाम है—चौधरी राजेश मोहन (एड.)
12 सितम्बर, 1963 को ग्राम छिंवली (देवरी, जिला सागर) की पावन मिट्टी में जन्मे इस व्यक्तित्व को माँ श्रीमती किशोरी देवी की ममता और पिता श्री चौधरी रामसेवक सिंह के संस्कारों का अमूल्य उपहार मिला। यही संस्कार आपके जीवन की दिशा और लक्ष्य तय कर दिए।
ज्ञान का साधक
ज्ञान-पिपासा से ओतप्रोत इस व्यक्तित्व ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं। बी.एस.सी., एल.एल.बी., एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य) और बी.सी.जे. जैसी उपाधियाँ अर्जित कर आपने यह सिद्ध किया कि निरंतर अध्ययन और गहन चिंतन ही सच्ची शक्ति है। उनका ज्ञान सिर्फ डिग्रियों तक सीमित न रहकर समाज-हित की मशाल बन गया।
समाज का दीपस्तंभ
जहाँ कुरीतियाँ थीं, वहाँ सुधार की आहट बने,
जहाँ अंधकार था, वहाँ उजियारा बनकर खड़े हुए।
उन्होंने संस्थाओं की स्थापना कर जनसेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया—
- गायत्री शक्तिपीठ मानव कल्याण संस्थान
- सर्वजातीय सामूहिक विवाह सेवा समिति
- भगवान तथागत गौतम बुद्ध ग्राम विकास शिक्षण समिति
- स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी महादेव प्रसाद स्मृति चेतनामंच
इन संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने सामूहिक विवाह, व्यसन मुक्ति, जल-संरक्षण, वृक्षारोपण और कुरीति उन्मूलन जैसे आंदोलनों को जनआंदोलन का रूप दिया। पिछड़े और दलित वर्गों में चेतना जगाने में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है।
साहित्य की साधना
आपका साहित्यिक योगदान अत्यंत समृद्ध और व्यापक है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं व स्मारिकाओं में सैकड़ों आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी रचनाओं ने समाज, इतिहास और संस्कृति को नई दृष्टि दी।
- मन का दीप जले तो जाने (संकलन) — आत्मा के उजाले की पुकार
- बुदेली शब्दकोष (संपादन) — भाषा और संस्कृति का संरक्षण
- पश्चिमी भारत के कुर्मी— समाज की जड़ों को पहचान
- अमर शहीद गुलाब सिंह पटेल - वीरता और त्याग की गाथा
- अपराजेय योद्धा चौधरी ढुलके सिंह - वीरता और त्याग की गाथा
- त्यागमूर्ति चौधरी महादेव प्रसाद— वीरता और त्याग की गाथा
- अमर शहीद वीरांगना तुलसालाई कुर्मी — नारी साहस का प्रतीक
- महामणि चाणक्य : वास्तविकता या भ्रांतिमान?— इतिहास और चिंतन का सवाल।
- भगवान महावीर स्वामी और भारत की श्रमण परम्परा— आध्यात्मिक परंपरा का अमिट चित्र।
ये केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि समय की गवाही और समाज का आईना हैं। ये कृतियाँ केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं।
नेतृत्व और सेवा
पिछड़ा वर्ग साहित्य प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष और अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के सक्रिय सदस्य के रूप में उन्होंने संगठन और समाज को नई दिशा दी।
उनका हर कदम कहता है—
“जब मन का दीप जलता है,
तो अंधकार स्वयं पीछे हट जाता है।”
जीवन का संदेश
चौधरी राजेश मोहन का जीवन हमें यह सिखाता है कि यदि मन में समाजसेवा का संकल्प और साहित्य के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी व्यक्ति समाज को नई दिशा दे सकता है। वे आज भी अपने कर्म, चिंतन और सृजन के माध्यम से लोगों को यह प्रेरणा दे रहे हैं
उनका जीवन एक पंक्ति में सिमटता है—
आज चौधरी राजेश मोहन केवल एक नाम नहीं, बल्कि आदर्श, प्रेरणा और समाज-चेतना, समाज, साहित्य और सेवा का अमर दीपस्तंभ हैं।
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