हरदा। मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया के नेतृत्व में बुधवार को नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन, चाणक्यपुरी में नर्मदापुरम संभाग के क्षत्रिय कुड़मी समाज के प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक संपन्न हुई। प्रदेश युवा संगठन अध्यक्ष तेजकुमार गौर ने बताया कि म.प्र. राज्य की ओबीसी सूची के क्रं 39 पर कुड़मी, कुर्मी, कुरमी का स्पष्ट उल्लेख है, परंतु भारत सरकार की केन्द्रीय ओबीसी सूची में कुड़मी का स्पष्ट उल्लेख न होने के कारण नर्मदापुरम संभाग सहित पूरे प्रदेश के कुड़मी छात्रों को नीट, जेईई, आईसीएआर, सीयूईटी, रेलवेज जैसी केन्द्रीय परीक्षाओं में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। गौरतलब है कि कुर्मी, कुरमी, कुड़मी एक ही जाति के पर्यायवाची हैं। केवल वर्तनी की भिन्नता के कारण हजारों परिवार वंचित हो रहे हैं। इसी विसंगति को दूर करने हेतु प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति को ज्ञापन सौंपा। इसी तारतम्य में नर्मदापुरम संभाग के प्रतिनिधि मंडल ने डॉ. कुसुमारिया का सम्मान करते हुए मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मां नर्मदा का छाया चित्र भेंट कर बैतूल, हरदा एवं नर्मदापुरम आने का निमंत्रण भी दिया।
NEET, JEE और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं में लाभ न मिलने का मुद्दा
प्रदेश युवा संगठन अध्यक्ष तेज कुमार गौर ने कहा कि राज्य स्तर पर ‘कुड़मी’, ‘कुर्मी’ और ‘कुरमी’ को एक ही समुदाय के रूप में मान्यता मिलने के बावजूद केंद्रीय सूची में नाम की भिन्नता से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, इसका असर NEET, JEE, ICAR, CUET, रेलवे और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं तथा भर्तियों में OBC आरक्षण के दावे पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि केवल वर्तनी की भिन्नता के कारण बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हो रहे हैं और इस विसंगति को दूर करने के लिए केंद्रीय सूची में ‘कुड़मी’ शब्द को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
ये प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में चौरिया कुर्मी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष नवीन पटेल, युवा प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश कुर्मी क्षत्रिय समाज तेज कुमार गौर, प्रदेश उपाध्यक्ष भीमराज गौर, हरदा जिलाध्यक्ष नर्मदा गौर, बैतूल जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वर्मा सहित समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इस विषय पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग जल्द विचार करे और आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए, ताकि मध्यप्रदेश के प्रभावित विद्यार्थियों और परिवारों को केंद्रीय स्तर पर OBC लाभ प्राप्त करने में आने वाली समस्या दूर हो सके।