अहमदाबाद। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर गुजरात में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अहमदाबाद स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गुजरात कांग्रेस प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके बाद सुरजेवाला और अन्य नेताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति ट्रस्ट के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।
इस विशेष आयोजन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनशा पटेल को उनके योगदान के लिए ‘सरदार रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पाटीदार समाज के कई प्रमुख व्यक्तित्वों और गणमान्य लोगों की भी उपस्थिति रही।
कौन हैं दिनशा पटेल?
दिनशा पटेल गुजरात की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका पूरा नाम दिनशा झावेरभाई पटेल है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। उनका जन्म 25 मई 1937 को बड़ौदा (वर्तमान वडोदरा), गुजरात में हुआ था। दिनशा पटेल का राजनीतिक कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से गुजरात का नाडियाड और खेड़ा क्षेत्र रहा है। वे वर्ष 1996 से 2014 तक खेड़ा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में उन्होंने खान मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों में केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। करीब पांच दशकों के राजनीतिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन में सक्रियता के कारण दिनशा पटेल गुजरात के वरिष्ठ राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं।
लौह पुरुष सरदार पटेल से क्या है दिनशा पटेल का जुड़ाव?
दिनशा पटेल का सरदार वल्लभभाई पटेल से कोई प्रत्यक्ष पारिवारिक या रक्त संबंध नहीं है। हालांकि, उनका जुड़ाव सरदार पटेल की विचारधारा, उनके आदर्शों और उनसे संबंधित संस्थागत गतिविधियों से रहा है। वे सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़े स्मारक एवं स्मृति कार्यों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार से जुड़े रहे हैं। सरदार पटेल के विचारों, राष्ट्रीय एकता, शिक्षा और सामाजिक सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी वैचारिक और संस्थागत जुड़ाव के संदर्भ में उन्हें ‘सरदार रत्न’ सम्मान प्रदान किया गया।
