लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल को नया नेतृत्व मिल गया है। महाराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट से विधायक वीरेंद्र चौधरी को कांग्रेस विधानमंडल दल का 15वां नेता बनाया गया है। शुक्रवार को उन्होंने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ भी मौजूद रहीं। वीरेंद्र चौधरी ने युवाओं, महिलाओं, छात्रों और किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बदलाव का चुनाव होगा और इंडिया गठबंधन मिलकर मजबूती से चुनाव लड़ेगा।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के इतिहास में विधानमंडल दल के नेताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। अब तक 14 नेता इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें कई ऐसे दिग्गज नेता शामिल रहे, जिन्होंने आगे चलकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली और प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें 10 नेता ऐसे रहे जिन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में भी प्रदेश का नेतृत्व किया। वीर बहादुर सिंह इस क्रम में मुख्यमंत्री बनने वाले अंतिम सीएलपी नेताओं में शामिल थे।
कौन हैं वीरेंद्र चौधरी?
वीरेंद्र चौधरी महाराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं। उन्होंने वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी बजरंग बहादुर सिंह को 1,087 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में वीरेंद्र चौधरी को 84,755 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 83,668 वोट प्राप्त हुए थे। इस जीत के साथ उन्होंने पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी वह बेहद कम अंतर से चुनाव हार गए थे। फरेंदा विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने इससे पहले वर्ष 2002 में जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्याम नारायण ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इस सीट पर विजय प्राप्त की।
पार्टी के भरोसे पर खरा उतरने का करूंगा प्रयास’
कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता बनाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वीरेंद्र चौधरी ने इसे अपने लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि गोविंद बल्लभ पंत से लेकर प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा ‘मोना’ तक कई वरिष्ठ नेता इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभा चुके हैं। ऐसे में पार्टी की ओर से उन्हें यह दायित्व सौंपा जाना उनके लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने कहा कि वह सदन में कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखेंगे और जनता की आवाज बनकर उनके मुद्दों को उठाएंगे। उनके मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास जताया है, उसे बनाए रखने के लिए वह पूरी निष्ठा से काम करेंगे।
भाजपा की लहर में जीत को बताया जनता के विश्वास का परिणाम
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का जिक्र करते हुए वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि उस समय भाजपा के पक्ष में माहौल होने के बावजूद फरेंदा की जनता ने उन पर भरोसा जताया। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधायक बनने के बाद से उन्होंने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि उनके काम का आकलन क्षेत्र की जनता से बातचीत करके किया जा सकता है और उन्हें विश्वास है कि लोग उनके प्रयासों से संतुष्ट हैं।
2027 के चुनाव को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर वीरेंद्र चौधरी ने दावा किया कि वर्ष 2027 में भाजपा के पक्ष में पिछली बार जैसा चुनावी माहौल नहीं रहेगा। उन्होंने बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, परीक्षाओं के रद्द होने और किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से जुड़ी चिंताओं को उठाते हुए प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि युवाओं, महिलाओं, छात्रों और किसानों की समस्याएं आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण मुद्दे होंगी। उनका दावा है कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा।
पंकज चौधरी को लेकर भी दिया बयान
महाराजगंज से भाजपा सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से जुड़ी चुनौती पर प्रतिक्रिया देते हुए वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि वह पहले भी लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग हुआ था और पंकज चौधरी लगभग 28 हजार वोटों के अंतर से जीते थे। यह उनका राजनीतिक आरोप है।
वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि वह लगातार जनता के बीच अपनी बात रखते आए हैं और आगे भी जनसमर्थन के आधार पर अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।
2027 पर नजर, सदन में विपक्ष की भूमिका होगी अहम
विधानमंडल दल के नए नेता के रूप में वीरेंद्र चौधरी के सामने सदन में कांग्रेस की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने और पार्टी के विधायकों के बीच समन्वय मजबूत करने की चुनौती होगी। वहीं, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए युवाओं, महिलाओं, किसानों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखना भी उनकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।