लौह पुरुष सरदार पटेल के बारे में 13 बातें जो आपको हैरान कर सकती हैं

लौह पुरुष सरदार पटेल के बारे में 13 बातें जो आपको हैरान कर सकती हैं

पीढ़ियां बीत जाती हैं। तब जाकर कहीं एक सच्चे नेता का जन्म होता है। जिसमें कुछ अकल्पनीय कर देेने का साहस हो। कुछ ऐसा कर गुजरने का साहस हो, जिससे करोड़ों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो जाए। सरदार बल्लभ भाई पटेल भी उन्हीं नेताओं में से एक हैं, जिन्हें भारत का सच्चा सपूत, सच्चा राजनेता कहा जाता है। उन पर हम भारतीयों को गर्व करना चाहिए।

हममें से बहुत कम लोगों को भारतीय समाज के प्रति सरदार पटेल के योगदान के संबंध में जानकारी है। एक ऐसे समय में जब आजाद भारत में आजादी के परवानों के योगदान पर बहस छिड़ी हो, हमें उनके व्यक्तित्व के बारे में जानना चाहिए। हम यहां एकीकृत भारत के जनक सरदार पटेल के उन अनछुए पहलुओं से आपको रूबरू कराएंगे, जिनके बारे में आपको शायद ही पता हो।

1. सरदार बल्लभ भाई पटेल मन और प्रकृति से किसान थे। इसके बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक सफल वकील बने। अपने समकालीन नेताओं जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी की तरह उनका जन्म किसी धनी परिवार में नहीं, बल्कि एक किसान परिवार में हुआ था।

2. परिवार की आर्थिक दशा को देखते हुए सरदार पटेल ने उच्च शिक्षा हासिल करने से मना कर दिये थे। गुजरात के इसी ऐतिहासिक विद्यालय में सरदार पटेल ने अपनी शिक्षा पूरी की थी। खराब आर्थिक स्थिति होने के बावजूद पटेल के पिता ने उनकी शिक्षा के लिए कर्ज लेकर धन का इन्तजाम करने की सोची। लेकिन बल्लभ भाई को यह मंजूर नहीं था। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्होंने लोगों से किताबें मांग कर पढ़ाई की और अव्वल रहे।

3. आजाद भारत में कांग्रेस पार्टी के सबसे काबिल नेता होने के बावजूद सरदार बल्लभ भाई पटेल प्रधानमंत्री नहीं बन सके। वह उप-प्रधानमंत्री बने। सरदार पटेल के प्रधानमंत्री न बनने के पीछे कई कहानियां हैं। लेकिन यह भी सच है कि अगर सरदार पटेल को जवाहर लाल नेहरू के बदले आजाद भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलता तो इतिहास कुछ और होता।

4. यह भारत जो आज दिखाई दे रहा है, 565 स्थानीय रियासतों का एक समूह है। सरदार पटेल ने इन रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत का निर्माण किया था। आजादी के बाद जब रिसायतें अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखना चाहतीं थीं, तब सरदार पटेल आगे आए और इन्हें एक साथ आने के लिए बाध्य किया। सही मायने में उन्हें आधुनिक भारत का जनक कहा जाना चाहिए। आज के समय में जब हम किसी एक व्यक्ति को नहीं समझा कर तैयार नहीं कर सकते, सरदार ने सभी रियासतों के राजाओं को एक-सूत्र में बांध दिया था।

5. हैदराबाद के निजाम और जूनागढ़ के नवाब ने भारत में अपने रियासतों के विलय से साफ इन्कार कर दिया था। सरदार पटेल ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए सेना का इस्तेमाल किया। वर्ष 1948 में हैदराबाद के निजाम ने भारत में खुद को सम्मिलित करने की सहमति दे दी।

6. सरदार पटेल महात्मा गांधी के लिए वही थे, जो स्वामी रामकृष्ण परमहंस के लिए स्वामी विवेकानन्द थे।  सरदार पटेल पाश्चात्य पहनावे के शौकीन थे। इसके बावजूद, उन्होंने खादी को अपनाया। दरअसल इसकी प्रेरणा, गांधी जी थे। बाद में तो उन्होंने कई बार विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी और आंदोलनों में भाग लिया था।

7. जवाहर लाल नेहरू पाश्चात्य संस्कृति और अंग्रेजियत को पसन्द करते थे। जबकि सरदार पटेल अंग्रेजियत से दूर थे। वह राष्ट्रवादी थे। बहुत कम लोगों को पता है कि सरदार बल्लभ भाई पटेल दक्षिणपंथी विचारधारा के थे और हिन्दुत्व में उनका अटल विश्वास था।

8. सरदार पटेल ने प्रधानमंत्री का पद इसलिए ठुकरा दिया, क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी का विभाजन नहीं चाहते थे। कांंग्रेस पार्टी पर उनका अभूतपूर्व प्रभाव था। पार्टी की जिस बैठक में महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू मौजूद थे, उस बैठक में कांग्रेस कमेटी ने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नेहरू के नाम का प्रस्ताव नहीं रखा था। वर्ष 1946 में कांग्रेस पार्टी जब अपने अध्यक्ष पद का चुनाव कर रही थी, तब बहुमत सरदार पटेल के समर्थन में था। लेकिन जब सरदार को इस बात की जानकारी मिली कि जवाहर लाल नेहरू किसी के अधीन के नहीं बल्कि स्वतंत्र होकर काम करना चाहते हैं और इससे पार्टी के दो धड़ों में बंटने की आशंका थी, तब उन्होंने खुद अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग कर लिया।

9. सरदार पटेल शरणार्थियों के लिए ईश्वर साबित हुए। हम सरदार पटेल को भले ही उनकी राजनीतिक सूझ-बूझ के लिए जानते हैं। लेकिन वह न केवल ईमानदार बल्कि मानवतावादी भी थे। उन्होंने यह साबित भी किया। वह जब आधुनिक भारत के एकीकरण जैसे महान कार्य में लगे हुए थे, तभी उन्हें लाखों की संख्या में आ रहे शरणार्थियों का भी ध्यान था। उन्होंने सिर्फ हिन्दुओं का ही नहीं, मुसलमानों का भी समुचित ध्यान रखा।

10. देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न का अगर कोई हकदार था, तो वह पुरुष सरदार पटेल थे। लेकिन दुःखद है कि यह सम्मान उन्हें बहुत देर से वर्ष 1991 में दिया गया। जबकि इससे पहले पंडित जवाहर लाल नेहरू और इन्दिरा गांधी ने सत्ता में रहने के दौरान ही खुद को अपने जीवनकाल में ही इस सम्मान से सुशोभित कर लिया था।

11. सरदार पटेल देश को सुरक्षित रखना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए नीतियां भी बना रखीं थीं। जवाहर नेहरू कश्मीर समस्या का समाधान नहीं कर सके। कश्मीर मसले पर वह एक दिशाहीन राजनेता साबित हुए। जबकि सरदार पटेल के पास इस समस्या का भी समाधान था। यह सरदार पटेल की ही नीति थी कि भारतीय सेना सही समय पर कश्मीर पहुंच गई और इसे भारत का अंग बना लिया गया।

12. सरदार पटेल भारतीय संविधान सभा के महत्वपूर्ण सदस्य थे, जिन्होंने भारत के संविधान को बनाने में महती भूमिका निभाई थी।

13 सरदार पटेल राष्ट्रवादी थे। उनके लिए देश पहले था। यह उनके व्यक्तित्व की महानता थी कि उन्होंने कभी भी पद के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए काम किया। पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं था।

सरदार बल्लभ भाई पटेल का हम तहे-दिल से आभार व्यक्त करते हैं। आधुनिक भारत उनकी ही देन है। आप भी भारत के महान लौह पुरुष का आभार व्यक्त करिए।

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