कम ज़मीन में ज़्यादा मुनाफा: चेरी टमाटर की खेती बन रही है किसानों की पसंद

कम ज़मीन में ज़्यादा मुनाफा: चेरी टमाटर की खेती बन रही है किसानों की पसंद

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आज के समय में आबादी तेजी से बढ़ रही है, जबकि खेती योग्य ज़मीन लगातार कम होती जा रही है। इसके विपरीत अनाज, फल और सब्ज़ियों की मांग में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। इस चुनौती को देखते हुए किसान अब परंपरागत खेती से हटकर नई और लाभकारी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में छोटे किसानों के लिए 'चेरी टमाटर' की खेती एक बेहतरीन और मुनाफेदार विकल्प बनकर उभर रही है।

चेरी टमाटर की बढ़ती मांग और मुनाफा

चेरी टमाटर आकार में छोटे लेकिन स्वाद में मीठे और पौष्टिक होते हैं। इनकी सबसे अधिक मांग मेट्रो शहरों, रेस्तरां और सुपरमार्केट में होती है। सामान्य टमाटर की तुलना में इसके दाम 4 से 6 गुना अधिक होते हैं। बाजार में चेरी टमाटर की कीमत ₹100 से ₹150 प्रति किलो तक रहती है, जो किसानों के लिए अच्छा मुनाफा देने वाली फसल बनाती है।

किस तरह करें चेरी टमाटर की खेती?

प्लांट प्रोटेक्शन ऑफिसर सुनीत कटियार बताते हैं कि किसान चेरी टमाटर की खेती दो तरीकों से शुरू कर सकते हैं:

  1. बीज की बुवाई करके नर्सरी तैयार करें, फिर पौधों को खेत या पॉलीहाउस में लगाएं।
  2. तैयार पौधे सीधे गमलों, ग्रो बैग्स या पॉलीहाउस में बनाए गए बेड्स पर लगाएं।

चेरी टमाटर के पौधों को सहारे की जरूरत होती है, इसलिए उनके साथ लकड़ी या खंभे लगाना पड़ता है ताकि पौधे ठीक तरह से खड़े रहें और फल दे सकें।

देखभाल और ज़रूरी सावधानियाँ

  • पौधों को रोजाना पानी देना होता है।
  • फूल और फल आने के समय विशेष ध्यान रखना ज़रूरी है।
  • फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए समय-समय पर निगरानी और जैविक उपाय करना चाहिए।

पॉलीहाउस: ज्यादा उत्पादन और सरकारी सब्सिडी

चेरी टमाटर की खेती में पॉलीहाउस का प्रयोग करना फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे नमी और तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। पॉलीहाउस लगाने पर उद्यानिकी विभाग की ओर से 50% तक की सब्सिडी भी मिलती है, जिससे छोटे किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं।

शहरी खेती के लिए भी बेहतरीन विकल्प

जो लोग खेती नहीं कर सकते लेकिन थोड़ी-सी जगह उपलब्ध है, वे अपने घर की छत या बालकनी में गमलों में चेरी टमाटर उगा सकते हैं। एक गमला आम तौर पर 5 से 10 किलो तक फल दे सकता है, और अगर पौधों की सही देखभाल की जाए, तो वे लगातार 4 महीने तक फल देते हैं।